मक्का में हज यात्रियों ने मनाई ईद
ईद का पर्व : ईद-उल-अजहा
के दिन पैगंबर हजरत इब्राहीम अलैयसलाम ने अपने पुत्र हजरत इस्माईल
अलैयसलाम को खुदा के नाम पर कुर्बान कर दिया था और इसी कुर्बानी की भावना
को जाहिर करने के लिए ईद-उल अजहा का पर्व मनाया जाता है।
प्रशासन की अपील : प्रशासन
ने इस बार तीर्थयात्रियों से सिर्फ दोपहर की बजाय दिन में किसी भी वक्त
शैतान को पत्थर मारने की अपील की है, ताकि एक ही समय हजयात्रियों के जमावड़े
से बचा जा सके। इस्लामी परंपरा में दोपहर में ही शैतान को पत्थर मारना
मुफीद माना गया है।
शैतान को मारे पत्थर : सऊदी
अरब में मुस्लिम तीर्थ स्थल मक्का के पास स्थित सँकरी घाटी में २० लाख से
अधिक हजयात्रियों ने शैतान को पत्थर मारने की रस्म प्रारंभ कर इस पवित्र
तीर्थयात्रा के सबसे चुनौतीपूर्ण और खतरनाक पड़ाव को पूरा किया।
हालाँकि
शैतान को पत्थर मारने की यह रस्म तीन दिन की होती है, लेकिन ईदुज्जुहा के
पर्व पर इस रस्म की शुरुआत होने के कारण सभी तीर्थयात्री इस मौके पर ही
शैतान को पत्थर मारने की रस्म पूरी करने की हसरत रखते हैं। इस लिहाज से
लाखों की संख्या में आए हज यात्रियों ने मंगलवार को एकसाथ पत्थर मारने की
रस्म पूरी की। दूसरी ओर इस हुजूम को संभालने के लिए प्रशासन भी बहुत चुस्त
दिखाई दिया।
प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती : हज
प्रशासन ने बताया कि इस बार तीर्थयात्रियों को कतारबद्ध होकर मीना घाटी से
एक-एक कर निकाला गया, जहाँ से उन्होंने शैतान को पत्थर मारने की रस्म अदा
पूरी की। इस सँकरी घाटी में बने पुल से होकर गुजरने वाली लाखों की भीड़ को
संभाल पाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। वर्ष 2006 में भीड़ के अनियंत्रित
होने के कारण मची भगदड़ में 362 लोगों की मौत हो गई थी।
हज
प्रशासन ने इस साल यात्रियों की भारी तादाद को देखते हुए मीना घाटी में
बने जमारात पुल को और ज्यादा मजबूत करते हुए इसे चार खंड वाला बना दिया है।
इससे अधिक संख्या में हज यात्री रस्म अदायगी कर सकें।
मिस्र
से आए हजयात्री ओसामा खसाबा ने बताया कि इस बार कतार में जाने के नियम का
सख्ती से पालन होने के कारण रस्म अदायगी में ज्यादा वक्त लगा, लेकिन यह
तरीका सुविधाजनक और सुरक्षित है।
बड़ी मस्जिद की ओर लौटे यात्री : स्थानीय
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस बार हज के लिए लगभग 24 लाख से अधिक यात्री
आए हैं। इनमें से 17.2 लाख विदेशी हजयात्री होने का अनुमान है। हजारों
तीर्थयात्रियों ने शैतान को पत्थर मारने के बाद मक्का स्थित बड़ी मस्जिद में
लौटना शुरू कर दिया है।
इसके
साथ ही हज के नियमों के मुताबिक पुरुष तीर्थयात्री सिर मुंडाने की परंपरा
का निर्वाह कर रहे हैं। बड़ी मस्जिद में बाल काटने के काम में जुटे एक नाई
ने बताया कि तीर्थयात्रियों की भारी संख्या को देखते हुए वह अपना काम बहुत
तेजी से कर रहा है और एक तीर्थयात्री के बाल काटने में उसे महज 3 मिनट का
समय लग रहा है।
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